हमारी आशाओं के आयाम
August 31, 2018 • Manohar Manoj Kumar

भारतीय गणतंत्र के 67 साल बाद के परिदृश्य पर जब हम नजर डालते हैं तो हम पाते हैं कि या तो हमारे सामने विभिन्न सरकारों द्वारा प्रायोजित आख्यान या व्याख्यान दिखाये जाते रहे हैं या फिर हमें भारत के विभिन्न क्षेत्रों की बेहद उदासीन और मलीन तसवीर दिखाई पड़ती रही है। परन्तु इन दोनो स्थितियों से इतर जब हम देश के अनेकानेक क्षेत्रों में मौजूद परिस्थितियों और उपलब्धियों का तटस्थ जायजा लेते हैं तो हम पाते हैं कि देश में तमाम बाधाओं, अवरोधों, रूकावटों तथा भ्रष्ट और आलसी नौकरशाही की मौजूदगी, राजनीतिक सुधारों के प्रति बेरुखी तथा देश में पूरी तरह से चाक चौकस और फुलप्रुफ सिस्टम के अभाव के बावजूद इस 67 वर्षीय भारतीय गणतंत्र ने कुछ ऐसे मिसाल कायम किये हैं जो उन समस्याओं के मरुस्थल में हरे भरे प्रदेश के सदृश दिखाई देते हैं। इनमें हमारे यहां कुछ रोल मॉडल विभूतियां मौजूद हैं, कुछ रोल मॉडल संस्थाएं मौजूद हैं तो कुछ रोल मॉडल नीतियां, अभियान और कार्यक्रम मौजूद हैं जो हमें देश के समाज के विभिन्न तबकों तथा देश के जनजीवन के अनेकानेक क्षेत्रों के वर्तमान और भविष्य के लिए बहुत बड़े प्रेरणा श्रोत साबित हो सकते हैं।