पर्यटन के नये ब्रांड एंबैस्डर प्रधानमंत्री
September 10, 2019 • Manohar Manoj

पर्यटन के नये ब्रांड एंबैस्डर प्रधानमंत्री

मनोहर मनोज

प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने लाल किले की प्राचीर से जिस तरह देशवासियों से अगले तीन साल में देश के प्रंद्रह पर्यटन स्थलों के भ्रमण करने की अपील की उससे यह बात साबित हो गई कि प्रधानमंत्री के रूप में वह अपनी अनेकानेक भूमिकाओं के अलावा एक ब्रांड एंबेस्डर की भूमिका का प्रमुखता से निर्वाह करना चाहते हैं। घरेलू पर्यटन को लेकर उनकी यह अपील देश की अर्थव्यवस्था के लिए तो बेहद दिलचस्प है। दूसरी तरफ इस घोषणा के जरिये प्रधानमंत्री ने यह बता दिया कि वह एक ऐसे प्रो एक्टिव मल्टी ब्रांड एंबैस्डर है जिस भूमिका से वह अपना प्रशासकीय उद्येश्य तो हासिल करते ही हैं साथ साथ इसमें उनका प्रचूर राजनीतिक फायदा भी अन्र्तनिहित होता है। एक ऐसा राजनीतिक फायदा जो उनका कारपोरेट ब्रांड की तरह नये राजनीतिक जमाने का एक अलग पालीटिशयन ब्रांड इमेज गढता है साथ साथ उसे मजबूत भी बनाता है। इन सक्रियताओं के जरिये मोदी एक पथ दो काज का वह लक्ष्य हासिल करते हैं जिसमे उन्हें मीडिया कवरेज के अनेकानेक नये आयाम हासिल होते हैं।

बताते चलें विगत में प्रधानमंत्री मोदी ने ऐसी ही अपील खादी वस्त्रों को अलग अलग परिधान के रूप में उपयोग करने की अपील की थी। उस अपील का जबरदस्त असर पडा और उस दौरान केन्द्रीय खादी व ग्रामोद्योग आयोग के मुताबिक एक साल में देश भर में खादी कपड़ों की बिक्री में पच्चीस फीसदी की वृद्धि दर्ज हुई। इसी तरह पिछली यूपीए सरकार ने एलपीजी सब्सिडी स्वेच्छा से छोडऩे की योजना शुरू की गई थी परंतु उस योजना को प्रधानमंत्री मोदी ने अपने पहले कार्यकाल की शुरूआत में गिव अप योजना में बदलकर देश के लाखों मध्यवर्गीय लोगों को एलपीजी सब्सिडी छोडऩे के लिए यह कहकर उत्प्रेरित किया कि इस रकम से ग्रामीण महिलाओं को एलपीजी मुहैय्या कराने में मदद मिलेगी। मोदी यहां भी खूब सफल रहे और उनके इस गिवअप स्कीम की वजह से करीब एक करोड़ अमीर उपभोक्ताओं ने बिना सब्सिडी वाली एलपीजी लेना शुरू किया जिससेे हुई सब्सिडी रकम की बचत से उज्जवला योजना की आधारशिला बनी। कहने की जरूरत नहीं कि यह योजना बाद में मोदी सरकार की एक गेमचेंजर योजना बन गई।

कहना ना होगा कि प्रधानमंत्री का यह ब्रांड एंबैस्डर रोल उनके राजनीतिक विरोधियों को भी भाया और यही वजह है कि जब दिल्ली के निवृतमान मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल ने जब दिल्ली की सडक़ों पर ट्राफिक का बोझ हल्का करने के लिए आड इवन स्कीम शुरू की थी तब भी उन्होंने प्रधानमंत्री मोदी से इस बाबत लोगों से अपील करने का अनुरोध यह कहकर किया था कि उनकी बातों का लोगों पर असर पड़ता है। प्रधानमंत्री मोदी ने इसी तरह अपने मन की बात कार्यक्रम के लिए एक तरह से हाशिये पर जा चुके जनसंचार माध्यम रेडियो को चुना। रेडियो के इस कार्यक्रम की वजह से देश भर में इस सबसे त्वरित जनसंचार माध्यम के श्रोताओं में भयंकर इजाफा हुआ। कहा जाता है कि समाज और शासन जमाने के सापेक्ष ढलना चाहिए और इस बात को प्रधानमंत्री मोदी ने बड़े अच्छे से भांप कर लोकतंत्र में जनमत की मार्केर्टिंग करने का अपना यह फार्मूला अपनाया है। मोदी अपनी कई योजनाओं में सोशल रिफार्मर, कई विदेशी रैलियों में निवेश आकर्षित करने तो कई चुनावी रैलियों में पालीटिकल मैनजमेंट गुरू की भूमिका में बखुबी दिखे हैं जिसका अंत में वह राजनीतिक फायदे की फसल काटने में भी सफल होते हैं

बहरहाल उनकी यह नयी अपील देश में घरेलू पर्यटन में एक नयी जान फूंकने को लेकर की गई है। यहां भी मोदी एक तरह से घरेलू पर्यटन के इन्क्रेडिबल इंडिया का स्वरूप प्रस्तुत करने जा रहे हैं। गौरतलब है कि अपनी पहले कार्यकाल में इन्क्रेडिबल इंडिया के ब्रांड एंबैस्डर के रूप में अमीर खान को मोदी सरकार ने आगे नहीं जारी रखा। लगा कि कोई और आएगा परंतु अब इस भूमिका का निर्वाह लगता है मोदी ही करेंगे। लोगों का मानना है कि भारत के उच्च मध्य वर्ग के लोग अपनी छुट्टिया मनाने के लिए विदेशों में जाते है जिसमे देश की विदेशी मुद्रा घटती है तो दूसरी तरफ घरेलू पर्यटन स्थल उपेक्षित होते हैं। पिछले एक दशक में भारत में विमान यात्रा करने वाले और उसमे भी विदेश जाने वालों की संख्या तेजी से बढ़ी है। पिछले साल करीब पौने चार करोड भारतीयों ने विदेश यात्राएं की जिसके इस वर्ष पांच करोड़ हो जाने की संभावना है। इसके मुकाबले विदेशों से भारत आने वाले पर्यटक महज 80 लाख है जिसके इस साल एक करोड हो जाने की उम्मीद है। ऐसे में प्रधानमंत्री की अपील के अनुरूप यदि देशवासी अगले तीन साल में देश के १५ पर्यटक स्थलों का भ्रमण करते हैं तो देश के घरेलू पर्यटन में एक बड़ा टर्नअराउंड आ सकता है। कहना ना होगा पर्यटन एक ऐसा क्षेत्र है जिसमे सेवा और उद्योग क्षेत्र के एक नहीं करीब पचास क्षेत्र अन्तरसंबंधित हैं जिससे एक से दूसरे क्षेत्र के कारोबार के आर्थिक उत्थान पर बहुगुणीय असर पड़ता है। मोटे तौर पर परिवहन के सभी माध्यम, होटल, वाणिज्य गतिविधियां पर्यटन से प्रत्यक्ष रूप से प्रभावित होते हैं जिससे रोजगार की हर श्रेणी का सृजन होता है। कहना ना होगा देश की अर्थव्यवस्था को जिस नोटबंदी व जीएसटी से जो चपत पड़ी है उसे प्रधानमंत्री की घरेलू पर्यटन की यह अपील एक बड़ा आर्थिक टानिक का काम कर सकती है। देश में भारत माला व सागरमाला जैसी योजनाएं जो एक तरह से देश की परिवहन सुविधाओं की आधारभूत संरचना में भारी बढ़ोत्तरी की योजना है उससे इस नये घरेलू पर्यटन की जुगलबंदी भारत की अर्थव्यवस्था में एक नयी जान फंूक सकती है। दूसरी तरह देश में पचास नये प्रस्तावित हवाई अड्डों और विमान सेवा उद्योग को भी इससे एक नयी गति मिलने की संभावना है। बताते चलें कि पर्र्यटन रियल इस्टेट की तरह एक बहुआयामी क्षेत्र है। जिस तरह से रियल इस्टेट के मायने सिर्फ आवासीय सुविधाओं के विस्तार से नहीं है बल्कि इससे होटल, हास्पिटल, कमर्शियल व कम्युनिटी सेंटर तथा इन्डस्ट्रीयल कांप्लेक्सों का निर्माण भी जुड़ा होता है उसी तरह पर्यटन के मायने केवल मनोरंजनात्मक पर्यटन से नहीं है बल्कि इसमे तीर्थयात्राएं, कारपोरेट यात्राएं, विरासत व पुरातत्व यात्राएं, अध्ययन व पेशेवर यात्राएं कई तरह की यात्राएं शामिल हैं जो देश की अर्थव्यवस्था को गति भी देती है तो दूसरी तरफ ये अर्थव्यवस्था की बढ़ती गति से भी प्रभावित होती हैं।

प्रधानमंत्री की देश के पंद्रह पर्यटक स्थलों की यात्राएं करने की अपील कहीं ना कहीं देश के प्रमुख पर्यटक स्थलों की आधारभूत सुविधाओं को और बेहतर बनाने की ओर भी इशारा करता है। इस दिशा में केन्द्र और राज्य दोनों के लिए यह एक अवसर भी प्रदान कर रहा तो दूसरी तरफ उन्हें अपनी नयी भूमिका के निर्वाह की तरफ इशारा कर रहा है। बताते चलें पर्यटन दुनिया में कई देशों के आमदनी  का सबसे बड़ा श्रोत हैं तो भारत की पांच हजार पुरानी संस्कृति व सभ्यता तथा जीवन के अनेकानेक रंगों तथा भोगोलिक स्वरूपों से सुसज्जित भारत का पर्यटन क्षेत्र भी इस श्रेय को क्यों नहीं हासिल कर सकता? भारत के भी तीन राज्य कश्मीर, राजस्थान व केरल अपनी आमदनी का सबसे बड़ा जरिया पर्यटन को बना सकते हैं। हो सकता है कश्मीर का नया राजनीतिक स्वरूप इस प्रदेश के अतीत के महान गौरव पर्यटन को विश्वव्यापी रूप प्रदान कर दे और इसे दुनिया में स्वीटजरलैंड के बेहतर विकल्प का भी तगमा प्रदान कर दे। कम से कम प्रधानमंत्री की इस अपील से इस बात की संभावना काफी बलवती हुई है।